योग आवाहन गीत : “देह और मन से जुड़े दूर सभी रोग करें, चलो हम योग करें”

(वैश्विक योग-दिवस के पूर्वप्रभात में)

आह्वान गीत

अपने जीवन के लिए कुछ नये प्रयोग करें।
चलो, हम योग करें।
देह और् मन से जुड़े दूर सभी रोग करें।
चलो, हम योग करें।

ईश ने हम सभी को ज्ञान का प्रकाश दिया।
भूमि, जल, अग्नि, वायु और ये आकाश दिया।
पाँचो इन तत्वों की नेमत का हम उपभोग करें।
चलो, हम योग करें।

योगिराजर्षि पतंजलि ने ये वरदान दिया।
स्वस्थ रहने का सुखद छत्र सिर पे तान दिया।
योग के इस दिवस का हम सफल सँजोग करें।
चलो हम योग करें।

इससे तन-मन को औ’ प्राणों को शक्ति मिलती है।
साथ इंसान के ईश्वर की भक्ति मिलती है।
वक्त पड़ने पे एक दूजे का सहयोग करें।
चलो हम योग करें।

इसको मजहब से जोड़ करके कोई मत देखे।
सर्वहितकारी नीति,रीति और् नियत देखे।
इस प्रतिष्ठा के लिए यत्न सभी लोग करें।
चलो हम योग करें।

रचनाकार-आचार्य देवेन्द्र देव

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