एक दिन, पांच मुकदमें, अपराध धान की पराली जलाना, अपराधी काश्तकार

— खबरदार! —

बिलसंडा (पीलीभीत)। खबरदार! जो पराली जलाई। धान की पराली जलानें के अपराध में एक ही दिन में पांच काश्तकारों के खिलाफ राजस्व प्रशासन मुकदमा दर्ज करा चुका है,और अन्य काश्तकारों पर नजर रखी जा रही है,यदि किसी ने पराली जलानें की जुर्रत की तो खैर नही–? प्रशासन की नजर बेहद सख्त है। *जी हां,बीसलपुर के राजस्व प्रशासन का रूख मंगलवार को पराली जलानें बाले बिलसंडा थाना क्षेत्र के काश्तकारों के प्रति काफी सख्त नजर आया। तहसीलदार विवेक त्रिवेदी के निर्देश पर राजस्व निरीक्षक छत्रपाल, आशीष,प्रवीण और विजय आदि ने थाना क्षेत्र के गांव धनश्यामपुर के काश्तकार महेश्वर दयाल, नर्वदेश्वर प्रसाद, गांव मार के नरेश, गांव हेमपुर के संजीव, गांव नगरिया तिलागिर के रामदुलारे के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है। एक दिन में पांच काश्तकारों के पांच मुकदमों ने झकझोर कर रख दिया है। राजस्व प्रशासन का कहना है कि परनाली जलाना प्रतिबंधित है। काश्तकारों को चाहिए कि परनाली को जलाए न वल्कि खेत में ही गलाएं। इससे खेत की उर्वरा शक्ति बढ़ेगी।

प्रशासन के पास पराली नष्ट करने का कोई फार्मूला नहीं, वैज्ञानिक भी फेल

प्रशासनिक अधिकारी कितनी भी लंबी चौड़ी बातें कर लें परंतु हकीकत यह है कि उनके पास पराली को खेत में खपाने का कोई तरीका नहीं है। वैज्ञानिक भी इसको बिना जलाए नष्ट करने का तरीका अब तक नहीं खोज पाए हैं। अगर खोज लिया है तो किसानों को पहले प्रशिक्षित किया जाना चाहिए और उसके बाद ही कोई कार्रवाई की जानी चाहिए।

समर्थन मूल्य और मुआवजा दिलाने में कहां गायब हो जाती है प्रशासन की सख्ती

पराली में मुकदमा लिखाने में जितनी ततपरता दिखाई जा रही है अगर यही कानून धान खरीद में किसानों को समर्थन मूल्य दिलाने के प्रति सख्त किया जाए तो प्रशासन बिल्कुल फेल हो जाता है और किसी किसान को समर्थन मूल्य नहीं दिला पाता। किसानों की फसल अभी आंधी व बारिश से खराब हुई तब भी मुआवजा दिलाने में इसी राजस्व प्रशासन ने कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई थी। अब किसान को परेशान करने के लिए सारे हथकंडे अपनाए जा रहे हैं। इस की चौतरफा निंदा हो रही है।

रिपोर्ट-मुकेश सक्सेना एडवोकेट/ राजेन्द्र वर्मा

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