“राम विवाह का प्रसंग सुनकर प्रफुल्लित हुए श्रोता

बिलसंडा। नगर से सटे गांव घनश्यामपुर में चल रही रामकथा में रविवार को सीता स्वयंवर एवं राम विवाह को बड़े ही रोचक ढंग से प्रस्तुत कर उपस्थित श्रद्धालुओं को अभिभूत किया गया।

फर्रुखाबाद से आए कथावाचक पंकज मिश्र ने कहा कि सनातन धर्म में विवाह एक बार ही निश्चित किया गया है। यह बंधन जन्म जन्मांतर का होता है ऐसा हमारे धर्म में माना गया है। राम कथा के दौरान रामायण के चौपाई व दोहों के माध्यम से जब सीता स्वयंवर एवं राम विवाह का प्रसंग सुनाया तो वहां का पूरा माहौल राममय हो गया। उन्होंने जैसे ही सोहर ‘राघव धीरे धीरे चलो ससुराल की गलियां’ शुरू की तो भक्त भी अपने आप को नहीं रोक पाए और उनके स्वर में स्वर मिलाकर साथ देने लगे। इस दौरान पूरा वातावरण मन को छू जाने वाला था। उन्होंने कहा कि हमारे यहां विवाह के समय पति को सात फेरे 7 वचन व 7 संकल्प सात जन्मों के लिए दिलाया जाता है। उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी अपने माता-पिता द्वारा स्वीकृत विवाह को जल्दी स्वीकार नहीं करता जबकि आज से दो-तीन दशक पहले ना तो कन्या वर को देख पाती थी ना वर कन्या को देखता था और विवाह संपन्न होता था। आज का युवा अपने माता-पिता की पसंद को सम्मान नहीं दे रहा है यह उचित नहीं है।

हर पुत्र को अपने माता-पिता की आज्ञा को भगवान का आदेश समझना चाहिए। स्त्री को भी सास-ससुर की सेवा के साथ-साथ पति की सेवा भी करनी चाहिए। पति की सेवा कोई देव पूजा से कम नहीं। एक पत्नी के लिए पति परमेश्वर होता है तथा पत्नी को अपनी मर्यादा में रहकर पति की हर आज्ञा का पालन करना चाहिए यही नारी धर्म है।

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