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पौराणिक मान्यता के अनुसार महाभारत काल से हुई थी अनंत चतुर्दशी व्रत की शुरुआत

भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को अनंत चतुर्दशी मनाई जाती है. अनंत चतुर्दशी को अनंत चौदस के नाम से भी जाना जाता है. इस व्रत में भगवान विष्णु के अनंत रूप की पूजा होती है. इस दिन गणेश विसर्जन भी किया जाता है इसलिए इस पर्व का महत्व और बढ़ जाता है. इस बार अनंत चतुर्दशी का व्रत 1 सितंबर, मंगलवार के दिन पड़ रहा है. मान्यता है कि इस व्रत को 14 सालों तक लगातार करने पर विष्णु लोक की प्राप्ति होती है।

पंडित अनिल शास्त्री पुजारी शिव शक्ति धाम पूरनपुर।

अनंत चतुर्दशी पूजा का शुभ मुहूर्त

सुबह 5 बजकर 59 मिनट से 9 बजकर 40 मिनट तक

गणेश विसर्जन का शुभ मुहूर्त

सुबह 9 बजकर 10 मिनट से दोपहर में 1 बजकर 56 मिनट तक.

अनंत चतुर्दशी के दिन ही गणपति बप्पा को विदाई भी दी जाएगी. अनंत चतुर्दशी पर गणेश जी का विसर्जन शुभ माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन गणेश जी का विसर्जन करने से पुण्य फल मिलता है. ज्योतिर्विद रवि शास्त्री से जानते हैं अनंत चतुर्थी के महत्व के बारे में:

अनंत चतुर्दशी पूजा की विधि

अग्नि पुराण में अनंत चतुर्दशी व्रत के महत्व का वर्णन मिलता है. इस दिन प्रातःकाल स्नान के बाद पूजा स्थल पर कलश स्थापित करें. इसके बाद कलश पर भगवान विष्णु की तस्वीर भी लगाएं. एक धागे को कुमकुम, केसर और हल्दी से रंगकर अनंत सूत्र बनाएं, इसमें चौदह गांठें लगी होनी चाहिए. इस सूत्रो भगवान विष्णु की तस्वीर के सामने रखें. अब भगवान विष्णु और अनंत सूत्र की पूजा करें और ‘अनंत संसार महासुमद्रे मग्रं समभ्युद्धर वासुदेव। अनंतरूपे विनियोजयस्व ह्रानंतसूत्राय नमो नमस्ते।।’ मंत्र का जाप करें. इसके बाद अनंत सूत्र को बाजू में बांध लें. माना जाता है कि इस सूत्र को धारण करने से संकटों का नाश होता है।

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