
गन्ने की पत्ती खेत से हटाने भर को तो बढ़ा देते गन्ने का रेट
आय दोगुनी करने का किया जा रहा सिर्फ दावा लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और
किसान बोले लागत बढ़ी लेकिन कई सालों से नही बढ़ाया गन्ने का रेट
पूरनपुर। प्रदेश में जबसे योगी सरकार काबिज हुई है तब से गन्ने का रेट 1 रुपया प्रति कुंतल भी नहीं बढ़ाया गया है। ऐसे में किसानों की आमदनी दोगुनी कैसे होगी यह सवाल मुंह चिढ़ा रहा है। सरकार में बैठे लोग झूठा प्रचार करके जनता को बरगलाने में लगे हुए हैं।

यह कटु सत्य है कि खेती की लागत कई गुना बढ़ गई है। खाद, डीजल, मजदूरी सब कुछ महंगा हुआ है। नई समस्या खेत की पताई खेत से बाहर निकालने में आने वाले 3 हजार से 4 हजार प्रति एकड़ लेवर खर्च की आई है। किसान चौतरफा घिरा हुआ है पर उसकी कोई नही सुन रहा है। सरकार अपने प्रचार में आमदनी दोगुनी करने का राग अलापती है पर हकीकत कुछ और है। लागत के अनुरूप दाम नही बढ़ रहे हैं। कल प्रदेश में तीसरी बार गन्ना मूल्य न बढ़ाने से किसान निराश हुए हैं। जानिए क्या कह रहे हैं इलाके के किसान
100 रुपया बढ़ना चाहिए रेट
गन्ने की लागत जिस हिसाब से बढ़ी है रेट 100 रूपया कुंतल बढ़ना चाहिए पर कोई बढोत्तरी न करके हम सबको निराश किया गया। सरकार को अपने फैसले पर पुनर्विचार जरूर करना चाहिए। वरना झूठे दावे करना बंद कर देना चाहिए।
सुखलाल वर्मा, बंगला उर्फ मित्रसेनपुर।
चीनी मिलों के दबाव में योगी सरकार
ऐसा लगता है कि प्रदेश की योगी सरकार चीनी मिल मालिकों के दबाव में है। शायद इसी कारण गन्ने की रेट नही बढ़ा रही है। अगर सरकार बाकई में किसानों की आमदनी दोगुनी करना चाहती है तो रेट 400 प्रति कुंतल घोषित करे। ऐसा नही करती है कि कृषक हितैषी होने का ड्रामा बंद कर देना चाहिए।
राजकुमार सिंह, बागर।
कम से कम झूठ बोलकर संत परंपरा को ठेस तो न पहुचाओ
किसानों की 2022 तक आय दोगुना करने का दावा करने वाली मोदी सरकार की घोषणा को योगी जी ने पलीता लगाकर कर्ज में दबे किसानों को आत्महत्या करने को मजबूर कर रही है। जबसे योगी सरकार आयी है चीनी उद्योग के दवाब में गन्ने का भाव नहीं बढा पायी। ऐसे में किसानों की आय कैसे दोगुना होगी जबकि लागत प्रति वर्ष दस से पंद्रह प्रतिशत तक बढ रही है। गन्ने की पत्ती किसान जला नहीं सकते जिसको खेत से उठा कर बाहर दूर फेकने की लागत लगभग 3000 – 3500 रुपये प्रति एकड है। बशर्ते उसे पत्ती फेकने की जगह मिल जाय। पिछले तीन साल में खेती की लागत में कृषि मशीनरी, उर्वरक, डीजल, कीटनाशक व मजदूरी में बेहताशा वृद्धि ने किसानों की कमर तोड़ दी है। किसान बैंकों के ब्याज भी नहीं निकाल पा रहे हैं। सरकार सिर्फ भाषणों तक सीमित है। दूरदर्शन, समाचार पत्रों, मैगजीनों, सडकों किनारे बडे बडे होर्डिंग्स पर किसानों की उन्नति करने के नाम के विज्ञापन में सफेद झूठ प्रसारित करने पर लगी है। कुछ मत दो परंतु साधु संतों की गरिमा तो बनाए रखो, झूठ तो मत बोलो। सरकारी धान खरीद में एक प्रतिशत खरीद भी वास्तविक किसान की नहीं 99% खरीद दलालों बिचौलियों की हुई।
चौधरी धर्मेंद्र सिंह, पूर्व जिलाध्यक्ष भाजपा किसान मोर्चा




