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नोटबन्दी से भी बदतर है धान बिक्री की डगर

-महीनों से लाइन में किसान, पिछड़ रही गेहूं की बुबाई और गन्ने की कटाई

-किराये की ट्राली में धान लाने वाले हो गए बर्बाद, सेंटर तक कैसे पहुंचाएं गन्ना

पूरनपुर। धान बेचने के लिए लाइन में लगना किसानों को नोटबंदी से भी अधिक अखर रहा है। उनके ट्रैक्टर ट्राली धान भरकर मंडी के बाहर खड़े हैं, ऐसे में गेहूं की बुवाई भी अधर में लटक गई है। गन्ने की छिलाई व उसे सेंटर तक पहुंचाने के लिए भी ट्रैक्टर ट्राली की जरूरत है। ऐसे में किसान बहुत बड़ी मुसीबत में फंस गए हैं परंतु वे करें तो क्या करें उनकी समझ में कुछ भी नहीं आ रहा है। अधिकारी उनकी कुछ भी सुनने को तैयार नहीं हैं उल्टे किसानों से अभद्रता करके उन्हें चुप कराने में लगे हुये हैं।
गांव देहात में लगे अधिकांश सेंटर बंद हो गए हैं और जो बच्चे हैं उन्हें उठाकर मंडी समिति में लाया जा रहा है। जिसके चलते किसानों की मुश्किलें और अधिक बढ़ गई हैं। ऐसा पहली बार हुआ है कि किसान को अपना धान लेकर महीनों मंडी अथवा मंडी के बाहर सड़क पर कतार में लगना पड़ा है। किसानों को इस समय नोटबंदी के 50 दिन भी याद आने लगे हैं जब उन्हें 500-500 रुपए के लिए लाइन में लगना पड़ता था। ऐसे ही हालात इस समय धान बिक्री को लेकर हैं। प्रशासन की लचर नीति के कारण किसानों की मुसीबत कम नहीं हो रही है। देहात में लगे कई क्रय एजेंसियों के सेंटर शुरू होने से पहले ही बंद कर दिए गए। जो सेंटर गांव में बचे थे उन्हें भी उठाकर मंडी समिति में शिफ्ट कर दिया गया। ऐसे में किसानों को अपना ध्यान ट्राली में भरकर ट्रैक्टर जोड़कर उन्हें कतार में लगना पड़ा है। ट्रैक्टर ट्राली के अभाव में किसानों की मुसीबत बहुत अधिक बढ़ गई है। धान कटाई के तुरंत बाद गेहूं की बुवाई शुरू हो जाती है और गेहूं की बुवाई तभी होगी जब ट्रैक्टर से खेत की कई बार जुताई की जाएगी। जब ट्रैक्टर ट्राली मंडी में खड़ा है तो वह गेहूं के लिए खेत कैसे तैयार करें और गेहूं कैसे बो पाए यह बड़ी समस्या है और गेहूं की बुवाई लेट होने से उनकी अगली फसल भी प्रभावित होने के आसार बन रहे हैं। उधर चीनी मिलें चलने के बाद गन्ने की छिलाई और ढुलाई का काम शुरू हो जाता है। किसानों को गन्ना छीलकर उसे अपने नजदीकी गन्ना सेंटर पर पहुंचाना होता है। वहां भी दो-दो तीन-तीन दिन कतार में लगना पड़ता है। अब वे महीनों से मंडी में फंसे हुए हैं ऐसे में गेहूं की बुबाई व गन्ने की आपूर्ति भी नहीं कर पा रहे हैं और उन्हें आमदनी का एक संभावित जरिया भी हाथ से छिनता नजर आ रहा है। किसानों की समस्या पर अधिकारी बिल्कुल ध्यान नहीं दे रहे हैं। अगर देहात में सेंटर बढ़ाए जाते और देहात के सेंटरों को ना उठाया जाता तो किसान अपना धान वहां डाल कर अपने ट्रैक्टर ट्राली से दूसरा काम कर सकते थे परंतु अधिकारियों की गलत नीतियों के कारण उन्हें मंडी व मंडी के बाहर त्योहार तक मनाने पड़ रहे हैं। इससे किसानों में तीखा रोष देखा जा रहा है और उन्होंने इस मामले में कार्रवाई करने की मांग की है।

भाकियू का आरोप अफसरों की मिलीभगत से हो रही फर्जी खरीद

भारतीय किसान यूनियन लगातार फर्जी धान खरीद का आरोप लगा रही है। किसान नेता मनजीत सिंह का आरोप है सेंटरो पर किसान का 20 और मिलर का धान 80 फिसदी चढ़ाया जा रहा है। किसानों की कम तौल कर खानापूरी की जा रही है। उन्होंने स्थानीय अधिकारियों पर राइस मिलों से मिलीभगत का आरोप लगाते हुए कहा कि किसानों को डांट डपट कर चुप कराया जा रहा है और उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है। मानसिक प्रताड़ना के चलते कई किसान आत्महत्या तक की धमकी दे चुके हैं। इसके बाद भी अधिकारी अपना रवैया सुधारने को तैयार नहीं हैं।

विधायक मुख्यमंत्री से करेंगे अफसरों की शिकायत

धान खरीद में किसानों के साथ अन्याय हो रहा है। अधिकारी किसानों के साथ गाली-गलौज व अभद्रता कर रहे हैं। इन सब की वीडियो मेरे पास भी आए हैं। इन मामलों की शिकायत लखनऊ जाकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से करूंगा और किसानों का एक-एक दाना सरकारी दर पर खरीदने के लिए प्रयास करूंगा। कल सांसद जी की मीटिंगों में धान खरीद में खर्चा वसूलने की शिकायतें भी मिलीं हैं।
बाबूराम पासवान
विधायक, पूरनपुर।

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