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ईमानदार एसपी कैसे काट पाएंगे उगाही से बनी चौकी का फीता

-पूरनपुर में स्टेशन चौराहे पर बनाये गए चौकी भवन के लिए चौकी इंचार्ज ने की लाखों की उगाही, अफसर मौन

-गलत धंधों से जुड़े लोगों ने दिल खोलकर दिया धन, अब बोर्ड व पत्थर लगवाने की मची होड़, बेखौफ कर रहे गलत काम

पूरनपुर। आप सबने वह कहानी तो पढ़ी ही होगी जिसमें “अंगा फलाने का, कुर्ता ढिमाके का और अपनी तो सिर्फ मुंह ही मूछ है” कहा जाता है। कहानी का उक्त अंश पूरनपुर नगर में पुलिस विभाग द्वारा उगाही करके बनाई गई पुलिस चौकी के भवन पर फिट बैठता है। चौकी भवन में ईट, पत्थर, रेत, मोरिंग से लेकर सभी सामग्री गलत तरीके से जुटाकर एक तरह से भानुमती का कुनबा जोड़ा गया है। अब चौकी भवन पर अपने बोर्ड व पत्थर लगाने की होड़ भी रुपया देने वालों में मची है और वे पुलिस से अपने गलत काम भी बेखौफ होकर करा रहे हैं। इस चौकी भवन का उद्घाटन जनपद के ईमानदार पुलिस अधीक्षक जयप्रकाश से 18 दिसंबर को कराने की तैयारियां चल रही हैं। क्या पुलिस अधीक्षक बेईमानी करके बनाए गए इस भवन का फीता अपने हाथों से काट पाएंगे या उनके हाथ कैची तक नहीं जाएंगे? यह सवाल लोगों के मन में घूम रहा है। पुलिस अधीक्षक के मना करने पर किसी जनप्रतिनिधि, व्यापारी नेता या समाजसेवी से भी फीता कटाने पर मंथन चल रहा है।
जब पूरी दुनिया लॉकडाउन में कोविड-19 से मर खप रही थी और लोगों का काम धंधा व आमदनी खत्म हो रही थी उस समय पूरनपुर की पुलिस धन संग्रह करने भव्य चौकी भवन बनवा रही थी। लाखों रुपया एकत्र करके चौकी भवन बनाया गया। रंगाई, पुताई व टाइल्स लगवाकर सुंदर-सुंदर रंगीन लाइटें लगाई गई। चौकी प्रभारी के कमरे में एयर कंडीशनर भी लगाया गया। वीवीआइपी पुलिस चौकी के फोटो व वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल करके तारीफ लूटने का प्रयास किया गया। बड़े अफसरों को यह भवन दिखाया गया। अब इस पुलिस चौकी पर दोबारा रंग रोगन कराकर 18 दिसंबर को पुलिस अधीक्षक से फीता कटवाने की तैयारी चल रही है। सवाल यह है कि ईमानदार पुलिस अधीक्षक अपने हाथों से गलत तरीके से धन एकत्र करके बनाई गई इस पुलिस चौकी भवन का फीता भला कैसे काट पाएंगे। माना जा रहा है कि पुलिस अधीक्षक इस भवन का उद्घाटन करने से मना कर सकते हैं। ऐसे में पुलिस ने दूसरा प्लान किसी जनप्रतिनिधि, व्यापारी नेता अथवा समाजसेवी से फीता कटवाने की योजना तैयार कर रखी है। अब देखना यह है कि इस जिंदा मक्खी को कौन निगलता है। या फिर बिना उद्धाटन के ही चौकी भवन उगाही का अड्डा बना रहेगा। इस मामले की शिकायत ट्वीटर पर एडीजी व डीजीपी तक पहुंची है।

किसके आदेश पर हुई चौकी भवन हेतु उगाही

चौकी भवन बनाने के लिए सरकार से एक भी रुपया आवंटित नहीं हुआ था फिर किस अधिकारी के आदेश पर उगाही करके इस भवन को बनाया गया। यदि जन सहयोग की बात थी तो इसके लिए क्या कोई मीटिंग की गई या किसी अधिकारी ने लिखित या मौखिक आदेश दिया। या फिर नगर चौकी इंचार्ज ने अपनी मनमर्जी से ही उगाही शुरू करते हुए चौकी भवन का निर्माण करा डाला। जाहिर है कि अच्छे लोग तो कुछ चंदा ही दे पाएंगे परंतु लाखों में रुपया देने वाले अपने गलत काम पुलिस से कराने में अवश्य कामयाब हुए होंगे। ऐसे दानदाता कौन थे जिन्होंने चंदा देने के बदले पुलिस से काम लिया। वे काम क्या थे। कहीं गोकशी या मादक पदार्थों का धंधा करने वालों का धन तो इस पुलिस चौकी में नहीं लगा दिया गया। इस सब की जांच हो तो पुलिस अच्छे खासे लपेटे में आ जाएगी। कहीं चंदा देने वाले ही तो गोकशी, मादक पदार्थ व अवैध नर्सिंग होम तो नहीं संचालित कर रहे हैं। इसकी भी गोपनीय जांच होनी चाहिए।

पाक साफ है पुलिस तो क्यों नहीं लगाती दानदाताओं की सूची

मान लिया जाए कि पुलिस ने पूरी ईमानदारी से दान लेकर इस पुलिस चौकी भवन का निर्माण कराया है तो फिर पुलिस को उन सभी दानदाताओं की सूची चौकी भवन पर शिलालेख के रूप में लगानी चाहिए। इससे यह साबित होगा कि कितने लोगों ने कितना कितना चंदा दिया। पुलिस चौकी निर्माण में कितना रुपया खर्च हुआ यह भी सार्वजनिक किया जाना चाहिए। अभी तो लोग अपना बोर्ड व शिलालेख चौकी भवन पर लगा कर इसे एक तरह से अपना साबित करना चाहते हैं जिस पर तमाम सवाल भी उठ रहे हैं। ऐसे पत्थरों को लगाने के बाद जांच के डर से हटाया भी गया है जो जांच का विषय है। अगर दानदाताओं की सूची लगाने की बात की जाए तो भी पुलिस शायद मुकर जाएगी क्योंकि जितना धन पुलिस चौकी में नहीं लगा उससे कई गुना अधिक वसूला गया है ऐसे में पूरा हिसाब प्रस्तुत करना भी बड़ा सवाल होगा। चौकी भवन निर्माण के दौरान धनागमन नहीं रुका तो एक लग्जरी कार भी चौकी इंचार्ज ने लॉक डाउनकाल में ही खरीद डाली। जिसके चर्चे भी जनता में आम हैं।

सिर्फ टालमटोल करके बचाव कर रहे अफसर

चौकी भवन में भ्रष्टाचार का धन लगा होने के बाबत पूछने पर अधिकारी बहानेबाजी करके बचना चाहते हैं। पूरनपुर सीओ प्रमोद यादव से जब यह सवाल पत्रकारों ने धरना देने के दौरान किया तो वह कहने लगे कि चौकी भवन को पुलिस तो उठा कर ले नहीं जाएगी आपके नगर में ही रहेगा। उधर पुलिस अधीक्षक जयप्रकाश तक भी यह मामला पहुंचा है जिसपर वे जांच कराने की बात कह रहे हैं। चौकी भवन निर्माण हेतु उगाही में नगर चौकी इंचार्ज व एक चर्चित सिपाही की पूरी भूमिका रहने की चर्चा है। इन दोनों को पूरनपुर से हटाने पर ही निष्पक्ष जांच सम्भव हो पाएगी।

उगाही की होनी चाहिए जांच : विधायक

भाजपा सरकार किसी भी अधिकारी कर्मचारी को जनता से उगाही का अधिकार नहीं देती और न ही ऐसा करने की इजाजत देती है। अगर नगर पुलिस चौकी भवन का निर्माण पुलिस ने उगाही करके कराया है तो लोगों ने पुलिस से इसकी प्रतिपूर्ति भी जरूर कराई होगी। डीएम व एसपी को इसकी जांच कराकर ऐसा करने वालों पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। अगर जिला स्तर से कार्रवाई नहीं होती है तो शासन को लिखेंगे।
बाबूराम पासवान विधायक (भाजपा) पूरनपुर।

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