
वोटरों में गजब का उत्साह : नाव से नदी पार करके डाले वोट
-थारू बस्ती के मतदाताओं को रेत में कई किमी गिरते फिसलते चलना पड़ा पैदल, फिर भी नहीं टूटा हौसला
सतीश मिश्र, पीलीभीत। शारदा की तेज धार में डगमगाती नाव, नदी की रेत में 3 किलोमीटर से अधिक की पदयात्रा, रेत में फिसलते पांव जैसी अनेक दुश्वारियां भी मतदाताओं का हौसला नहीं तोड़ पाई। थारू बस्ती के बाशिंदों ने नदिया के इस पार आकर लोकतंत्र के महोत्सव में भागीदारी की और यह साबित कर दिया कि वाकई वोट अमूल्य है।
हम बात कर रहे हैं ढकिया केसरपुर के मतदान केंद्र की। यह मतदान केंद्र पूरनपुर विधानसभा क्षेत्र में पड़ता है। नेपाल बॉर्डर तक इस ग्राम पंचायत का विस्तार है। ढ़किया केसरपुर में पोलिंग बूथ बना था। इस गांव में बंगाली मतदाता निवास करते हैं। गांव में बूथ होने के कारण बंगाली मतदाताओं ने तो मतदान कर लिया परंतु इसी ग्राम पंचायत के मजरा धारू बस्ती में नदिया पार नेपाल सीमा पर रहने वाले लगभग 275 मतदाता ऐसे थे जिनके लिए मतदान केंद्र की व्यवस्था अभी तक जिला प्रशासन नहीं कर पाया है। इन लोगों ने ढकिया केसरपुर के बूथ पर आकर आज मतदान किया। बूथ तक आने के लिए इन लोगों को किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ा यह सुनकर आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे। सबसे पहले तो इन लोगों को गांव से पैदल चलकर शारदा के किनारे तक आना पड़ा। शारदा को पार करने के लिए नाव की व्यवस्था थी। लोग शारदा की तेज धार में डगमगाती नाव में बैठकर जान जोखिम में डालकर नदी के इस पार आए। चूंकि नदी की धारा दूसरी तरफ हो गई है इसलिए लगभग 3 किलोमीटर तक इन लोगों को पैदल चलना पड़ा। जिसमें करीब 1 किलोमीटर में रेत ही रेत था। रेत में पैर फिसलने के बावजूद इन लोगों ने मतदान के प्रति अपना जज्बा कम नहीं किया और गिरते पड़ते ढ़किया केसरपुर पहुंचकर मतदान किया। मतदान के बाद ही जलपान किया और फिर से पैदल राह नापते हुए नाव से नदी पार करके अपने घर तक पहुंचे। चूंकि नाव से मतदान करने आना था इसलिए गांव के 50 फ़ीसदी लोगों ने ही वोटिंग की। बूढ़े व बीमार मतदाता मतदान केंद्र तक नहीं पहुंच पाए। इस गांव तक हो सकता है कि जिला प्रशासन का मतदाता जागरूकता अभियान भी नहीं पहुंचा होगा, दूसरे मतदाता अभियान के संचालक भी इस गांव तक लोगों को जागरूक करने नहीं गए होंगे लेकिन इन लोगों में मतदान के प्रति, अपना कर्तव्य निभाने के प्रति जो हौसला था उसे कायम रखते हुए इन लोगों ने नदी के इस पार आकर मतदान किया। ऐसा इन लोगों ने पहली बार नहीं किया है। इससे पहले भी यह लोग नाव पर ही सवार होकर मतदान करने आते हैं। अगर समय बरसात का हो तो नदी की धारा कई किलोमीटर में फैल जाती है इसके बावजूद इन लोगों का वोट करने का जज्बा कम नहीं होता। पीलीभीत का मतदान प्रतिशत बढ़ाने में थारू बस्ती की भूमिका भी काफी अच्छी रही। यह बात निर्वाचन से जुड़े अधिकारियों को समझनी चाहिए और इनको सम्मानित किया जाना चाहिए। इन लोगों को नाव से नदी पार कराने में सीमा की सुरक्षा को तैनात एसएसबी की भूमिका भी काफी सराहनीय रही। इन लोगों ने भी निस्वार्थ सेवा करके मतदाताओं को अपना फर्ज निभाने में सहयोग किया।

