फिर हरदोई ब्रांच नहर में तैरता दिखा बाघ का शव, पीएम को भेजा
घुंघचाई। हरदोई ब्रांच नहर में बाघ का शव तैरता देखा गया जो झाड़ी में फंसा था। ग्रामीणों की सूचना के बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची लेकिन निकालने के साथ ही विभागीय फरमान के चलते आनन-फानन में उसे जंगल के अंदर ले जाया गया। इस दौरान गोपनीयता बनाए रखने के लिए वन विभाग टीम काफी सक्रिय रही। लोग फॉरेस्ट विभाग की कार्यप्रणाली पर प्रश्न चिन्ह लगा रहे हैं। क्षेत्र के हरदोई ब्रांच नहर में फिर से बाघ का शव लोहाना सोहना गांव के पास नहर की पक्की पटरी की ओर पानी में झाड़ियों में तैरता देखा गया। मामले की सूचना ग्रामीणों द्वारा वन विभाग की टीम को दी गई जिस पर सजग हुई टीम ने मौके पर पहुंचकर बाघ को निकालने के प्रयास शुरू कर दिए और उच्च अधिकारियों को घटनाक्रम के बारे ने बताया। बाघ को नहर से बाहर निकाल कर विभागीय अधिकारियों के निर्देशन पर जंगल के अंदर ले जाया गया। घटनास्थल पर कोई भी नाप जोक का कार्य नहीं किया गया कि बाघ की किस तरह और कैसे मौत हुई है। जंगली जानवरों की असमय मौत को लेकर के पशु प्रेमियों में रोष देखा जा रहा है।
नहर में लगातार मिलते रहे हैं बाघों के शव

बीते वर्ष 14 सितंबर को हरदोई ब्रांच नहर में बाघ का शव तैरता देखा गया। लोगों की सूचना के बावजूद वन विभाग की टीम पूरी तरीके से उसे जनपद की सीमा से बाहर भेजने के लिए तत्पर थी और हुआ भी ऐसा जिससे टाइगर रिजर्व क्षेत्र जो कि जनपद की पहचान है इसमें दाग ना लग सके लेकिन विभागीय अधिकारी इस बार चूक गए और घटनास्थल से बाघ को पानी से निकाल जरूर लिया गया और घटनाक्रम को छुपाने के लिए भरसक प्रयास किए गए। इस दौरान राहगीर मौके पर पहुंचे जिनको बड़े अधिकारियों ने डरा धमका कर भेजने का प्रयास किया कि मौके पर जंगल के अंदर जहां बाघ मृत लाया गया है वहां पर भीड़ एकत्र ना हो सके लेकिन जब मामले की जानकारी लोगों को लगी तो अधिकारियों से लोगों का भरोसा उठ चुका है कि ऐसे अधिकारियों के संरक्षण में वन्यजीवों का संरक्षण कैसे संभव है जो घटना को छुपाने में लगे हुए हैं।

मटेहना गांव में बाघ द्वारा जंगल से निकलकर खेतों में काम करने वाले ग्रामीणों पर हमला करने के बाद ग्रामीण बाघ पर हमलावर हो गए थे और संघर्ष में बाकी घायल होने के बाद मौत हो गई ग्रामीणों ने बताया कि इस मामले में बहुत हद तक सूचना मिलने के बावजूद वन विभाग के कर्मचारी उसे उपचार देने के लिए अक्षम रहे इसी के चलते उसकी मौत हुई है वहीं प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार लोगों ने बताया कि जब घायल बाघ को पकड़ने का रेस्क्यू चल रहा था तब ट्रैक्टर के नीचे घायल बाघ आ गया था जिससे उसकी मौत हुई थी लेकिन अपने कारनामे को दबाने के लिए निर्दोष ग्रामीणों पर भारी-भरकम मुकदमे वन विभाग के अधिकारियों द्वारा लिखे गए। आज इस मामले में कई निर्दोष इस मुकदमे से जूझ रहे हैं। वन विभाग की इस लापरवाही का आलम यह है कि आज तक टाइगर रिजर्व में वन क्षेत्र होने के बावजूद तार फेसिंग जैसी व्यवस्थाएं विभाग नहीं कर सका है। जिसके चलते जंगली जानवर बाहर निकल कर अकाल मौत के ग्राफ बन रहे हैं। ग्रामीण इसको लेकर काफी परेशान है वहीं वन्यजीवी प्रेमी इस घटनाक्रम से काफी दुखी है।
रिपोर्ट-लोकेश त्रिवेदी

