विश्व मानसिक स्वास्थ्य जागरुकता: मानसिक रोग के लक्षण दिखें तो निशंक डॉक्टर से करें संपर्क  

पीलीभीत। जिला अस्पताल के परिसर में राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम में गोष्ठी में
सीएमएस डॉ वीके तिवारी ने बताया की कामकाजी वयस्कों में से एक किसी न किसी मानसिक बीमारी से ग्रसित हैं। मानसिक बीमारियों में नकारात्मक विचार या हीन भावना आना, कम या ज्यादा सोना और अक्सर उलझन व घबराहट महसूस करना आदि से यदि कोई ग्रस्त है, तो उसे तत्काल चिकित्सकीय परामर्श की आवश्यकता है। सीएमएस ने शुक्रवार को विश्व मानसिक स्वास्थ्य जागरुकता सप्ताह के अंतर्गत गोष्ठी में बताया कि एक ही विचार मन में बार-बार आना, एक ही कार्य करने की बार-बार इच्छा होना, डर लगना, अनावश्यक शक होना, कानों में आवाज आना, मोबाइल फोन या किसी नशे का लत होना आदि भी मानसिक रोग के लक्षण हैं। जिला अस्पताल में मानसिक रोगियों का निशुल्क इलाज और दवा उपलब्ध हैं।यही वजह है कि इस वर्ष 10 अक्टूबर को मनाए जाने वाले विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस की थीम मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण को वैश्विक प्राथमिकता बनाएं, रखी गई है। इसे साकार करने के लिए आवश्यक है कि खुद में या किसी परिजन में अगर मानसिक रोग के लक्षण दिखें तो बिना देरी और संकोच के अस्पताल की मदद ली जाए।
यहां कर सकते हैं संपर्क
साइकोथैरेपिस्ट पल्लवी सक्सेना ने बताया कि जिले में राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य, कार्यक्रम में रोगियों और खासकर अवसाद के मरीजों को ये नंबर 8077737721 प्रत्येक कार्य दिवस में सक्रिय रहता है, जिस पर फोन करके आवश्यक मदद ली जा सकती है।

जिला अस्पताल में चलती है ओपीडी
सीएमएस वी के तिवारी ने बताया कि जिला अस्पताल में प्रत्येक सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को कक्ष संख्या 87 में मानसिक रोगियों के लिए ओपीडी चलाई जा रही है। इसके अलावा सीएससी और पीएससी पर भी राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम किए जा रहे हैं। इस अवसर पर जिला अस्पताल के, डॉक्टर प्रवीन कुमार, डॉ एसपी सिंह, मेेट्रन निशा अग्रवाल नर्स् आदि मौजूद रहे।

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