देववाणी : “कोटि-कोटि वन्दनाभिन्दन प्रणाम योग्य हो गया, निक्षेपण सफल चन्द्र-यान का”

अभिनन्दनम्

कोटि-कोटि वन्दनाभिन्दन प्रणाम योग्य
हो गया निक्षेपण सफल चन्द्र-यान का।
इसरो के वरदाई वैज्ञानिक वीर भी हैं,
बन गये शोभित स्वरूप स्वाभिमान का।
भारत का हर वासी अनुभव करता है,
‘देव’ इन वीरों पर गर्व का, गुमान का।
जिनके परिश्रम से सु-फला है और एक
अरुण चरण अन्तरिक्ष अभियान का।

कोटि-कोटि साधुवाद, कोटि शुभ कामनाएँ,
कोटि कोटि वैज्ञानिक वीरों को बधाइयाँ।
पार्थ के समान पृथवी से अन्तरिक्ष तक,
दृश्यमती दृष्टि वाले तीरों को बधाइयाँ।
चित्त की चपलता को चित्त करते चतुर
चेतना चढ़ाते चारु चीरों को बधाइयाँ।
हठ के हठीले, हौंस और हौंसलों के धनी,
हिम्मती हिमाद्रि-से हमीरों को बधाइयाँ।

चाँद पर यान अपना चला गया है अब,,
‘कालिया! बता, क्या होगा चाँद और तारे का।’
तारे जिसे दीखने लगे हैं दिन में ही,उस
नानपारे जाने वाले सारे पन्थ हारे का।
अहंकार वाले सूखते समुद्र खारे और
सेना के दबावों बीच बुझते अँगारे का।
राम करे करना पड़े न इन्तजाम ‘देव’
भारत के नायक को अगले इशारे का।


आचार्य देवेन्द्र देव (मथुरा प्रवास)

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