आधे अधूरे संसाधनों से खतरे में बाघों की सुरक्षा

घुंघचाई। जनपद के जंगल टाइगर रिजर्व में चयनित हो गए लेकिन वन कर्मियों का स्टॉप नहीं पढ़ाया गया। आधे अधूरे संसाधनों से फॉरेस्ट की हिफाजत कर रही है वही सबसे अधिक काम वन क्षेत्र के बाचरो से लिया जा रहा है । घटना दुर्घटना के दौरान यही सबसे कारगर साबित हो रहे हैं जिनको तय समय सीमा पर वेतन भी विभाग द्वारा नहीं दिया जाता है कहने को जनपद पीलीभीत के जंगल वन्यजीवों के लिए काफी मुफीद हैं लेकिन यहां शासन द्वारा इनको टाइगर रिजर्व में चयनित कर लिया गया और विभाग की ओर से अतिरिक्त स्टाफ की तैनाती नहीं की गई है जिसके चलते वन्यजीवों के साथ कई अनहोनी हो चुकी हैं कम स्टॉप होने के कारण इन पर रोकथाम नहीं लग पा रही है वही कम वेतन पाने वाले वन बाचर किसी भी घटना के दौरान फॉरेस्ट विभाग के लिए वरदान साबित हो रहे हैं। उनको समय रहते हर समय विभाग द्वारा उपयोग में तो लिया जाता है लेकिन इनको सीमा पर वेतन भी नहीं मिल पाता है जान जोखिम पर रखकर यह फर्स्ट कर्मी विभाग के अनसुलझे कामों को पूरी तरीके से करते हैं शनिवार को हरदोई ब्रांच नहर में बाघ नहर में तैरता देखा गया विभाग के फरमान पर बाचर ओं द्वारा इसे निकालने का प्रयास किया गया और वन कर्मी गहरा पानी होने के कारण डूबते डूबते बच्चे सूत्रों के अनुसार कई माह से इन वन कर्मियों को विभाग द्वारा तनख्वाह नहीं दी गई लेकिन फिर भी यह अपनी जान पर खेल कर विषम परिस्थितियों में ऐसे घटनाक्रमों में विभाग की मदद कर रहे हैं।

रिपोर्ट-लोकेश त्रिवेदी

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