बाघ की मौत की उच्चस्तरीय जांच शुरू : जांच समिति ने घटनास्थल का किया निरीक्षण

पीलीभीत (अमिताभ अग्निहोत्री)। पीलीभीत टाईगर रिजर्व में बाघ की मौत के मामले में वन्यजीव प्रेमियों के कदम उठाये जाने के बाद प्रमुख वन सरंक्षक वन्यजीव सुनील पांडेय ने पीलीभीत टाईगर रिजर्व में बाघ की मौत की उच्चस्तरीय जांच शुरू करा दी है।

प्रमुख वन संरक्षक वन्यजीव सुनील पांडेय ने अपर प्रमुख वन संरक्षक निदेशक टाइगर प्रोजेक्ट पीके शर्मा की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच समिति गठित की हैं। जांच समिति ने आज घटना स्थल का किया निरीक्षण में मुख्य वन संरक्षक रमेश पांडेय, कानपुर जू के डॉ.आरके सिंहको सदस्य बनाया गया है। उच्च स्तरीय जांच समिति आज दोपहर को पीलीभीत पहुंच गई।
समिति सीधे गढा वन विश्राम गृह पहुंची। फिर यह समिति वन संरक्षक ललित वर्मा, पीलीभीत टाईगर रिजर्व के क्षेत्र निदेशक डाॅ.एच.राजामोहन, उपनिदेशक नवीन खंडेलवाल, पीलीभीत वन एंव वन्यजीव प्रभाग के प्रभागीय निदेशक संजीव कुमार के साथ घटना स्थल पहुंची, जहां बाघ को टैंकुलाइज किया गया था। यह टीम कई कारों के काफिले में 2.55 बजे पर घटना स्थल पर पहुंची। उच्चस्तरीय जांच समिति ने अधिकारियों के साथ बाघ को ट्रैंकुलाइज करने वालेे स्थान पर पूरी जानकारी ली। टीम ने कई पहलुओं पर वन अधिकारियों से जानकारी ली। जांच टीम के अध्यक्ष पीके शर्मा ने वन अधिकारियों की फटकार भी लगाई।
जांच टीम ने उस स्थान का भी दौरा किया जहां एक मई को तीन लोगो पर बाघ ने हमला किया था। घटनास्थल पर जानकारी प्राप्त करने के बाद 3.30 बजे उच्चस्तरीय जांच टीम घटनास्थल से मौका मुआयना कर गढा वन विश्राम गृह लौट गयी। इस टीम ने गढा वन विश्राम गृह में स्थानीय वन अधिकारियों के साथ वार्ता भी की।

जानिए यह था मामला

मालूम हो कि तीन मई को पीलीभीत टाईगर रिजर्व से निकले एक बाघ को टैंªकुलाइज किया गया था। ट्रैंकुलाइज किये जाने के बाद आधे घंटे के अंदर ही उसकी मौत हो गई थी। बाघ की मौत हो जाने पर स्थानीय वन्यजीव प्रेमियों ने सवाल उठाये थे। उनका मानना था कि ओवरडोज से बाघ की मौत हुई थी। हालांकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बात सामने आई है कि बाघ की मौत उसको लगी चोटों से हुई थी। उसके पेट में पांच लीटर खून और पसली टूटी मिली है। इससे तो एक बात साबित हो गई है, बाघ की मौत स्वाभाविक नहीं बल्कि उसकी हत्या हुई है। बाघ की मौत होने के बाद प्रदेश के कई वन्यजीव प्रेमी इस मामले को लेकर सक्रिय हो गए है। वन्यजीव प्रेमी कौशलेंद्र सिंह ने बाघ की मौत को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अवगत कराया है। वहीं उप्र वन्यजीव बोर्ड के पूर्व सदस्य युवराजदत्त महाविद्यालय के सेवानिवृत्त प्रो.बीपी सिंह ने प्रदेश के वनमंत्री दारासिंह चैहान से प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच किये जाने की मांग की है। वन मंत्री दारासिंह चैहान ने आश्वस्त किया है कि इस प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कराई जाएगी। भारतीय किसान यूनियन नेता मनजीत सिंह ने ट्रेंकुलाइज टीम के खिलाफ एफ आई आर दर्ज करने और मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग की थी तो पत्रकार अमिताभ अग्निहोत्री ने भी इस मामले पर चिंता व्यक्त करते हुए जांच की मांग की थी।

रिपोर्ट अमिताभ अग्निहोत्री/महेंद्र पाल शर्मा

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