गन्ने में लगा लाल सड़न रोग, जिले में 45 फीसदी फसल प्रभावित, किसान हुए बर्बाद
–पूरनपुर मिल गेट क्षेत्र में सर्वाधिक प्रभाव, खेत के खेत सूखे
-गन्ने के कैंसर कही जाने वाली बीमारी का नहीं है कोई उपचार, साल भर नहीं लगा सकेंगे गन्ना
पीलीभीत। धान के बाद जिले के किसान गन्ने की फसल में भी मार झेलने को विवश हैं। जिले में करीब 45 फ़ीसदी गन्ना रेड राट यानी लाल सड़न रोग से प्रभावित है। काफी अधिक क्षेत्रफल में गन्ना खेतों में खड़ा सूख गया है तो कुछ खेतों में किसान बचे हुए गन्ने को खोजने का प्रयास कर रहे हैं। पूरनपुर की सहकारी मिल क्षेत्र के कई गांवों में यह बीमारी अपना असर दिखा रही है। इस बीमारी का कोई उपचार ना होने के कारण किसानों की समस्या बढ़ गई है। गन्ना व कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि किसानों को गन्ने की पुरानी प्रजाति बदलनी चाहिए और कम से कम एक सीजन रोग ग्रस्त खेत में गन्ना नहीं लगाना चाहिए। लिंक पर क्लिक कर देखिये वीडियो-
अपने देश में खेती को मानसून का जुआ कहा जाता है। यह बात अपने इलाके के किसानों पर भी सटीक बैठती है। पीलीभीत में धान बेंच पाने से परेशान किसान अब गन्ने की फसल में भी बड़ी मार झेलने को विवश हैं। जनपद में पुरानी प्रजाति के गन्ने में रेड राट यानी लाल सड़न रोग लग गया है। इस रोग के प्रभाव से गन्ना खेतों में सूख रहा है और बिल्कुल बेकार हो जा रहा है। किसान तमाम प्रयास करके भी इस रोग से फसल को नहीं बचा पा रहे हैं। क्योंकि इस रोग का कोई उपचार ही नहीं है। किसान बचे गन्ने को खेतों में तलाश रहे हैं। कोल्हू, क्रेशर व चीनी मिल वाले इस रोग ग्रस्त गन्ने को लेने से तोबा कर रहे हैं। इसके चलते किसानों की समस्या बढ़ी है और वे काफी परेशान हैं। किसानों को भारी नुकसान इस रोग के कारण झेलना पड़ रहा है। अधिकांश किसान रोग ग्रस्त गन्ने को नष्ट करके गेहूं की फसल बो चुके हैं। कुछ किसान अभी भी इसे काटने में जुटे हुए हैं। इस बीमारी को रोकने के लिए कोई दवा अभी तक नहीं बनी है। गांव देहात में इसे गन्ने का कैंसर भी कहा जाता है।
इन किसानों ने सुनाया दुखड़ा, फसल बीमा का लाभ नहीं मिला
पूरनपुर समिति के सिमरिया तालुका महराजपुर गांव में किसान रोग ग्रस्त गन्ना काटते नजर आए। गांव के भगवानदास व राजेन्द्र पुत्र नंदलाल का ढाई एकड़ गन्ना नष्ट हुआ है। बोले बचा गन्ना निकाल रहे हैं।
गांव के अलीहसन का 4 बीघा, कालिका का 1 एकड़, राधे का 5 बीघा व मैकू का भी काफी गन्ना रोग से नष्ट हो गया है। इस गांव के 2-4 किसानों को छोड़कर अन्य सभी किसानों का गन्ना रोग से खराब हुआ है। हालांकि इन किसानों को फसल बीमा योजना का भी लाभ नहीं मिला है। जबकि फसली ऋण लेने के दौरान काफी किसानों का बैंक व समितियों से फसल बीमा भी कराया गया है।
किसानों को बदलनी चाहिए गन्ने की प्रजाति
पूरे पीलीभीत जिले में 40 से 50 फीसदी गन्ना रेड राट रोग से प्रभावित है। इन काश्तकारों को गन्ने की पुरानी प्रजाति के बजाय नई प्रजाति का गन्ना बोना चाहिए और रोग वाले खेत में कम से कम 1 साल तक गन्ना नहीं बोना चाहिए। फिलहाल इस बीमारी की अभी तक कोई दवाई नहीं बनी है।
डॉ. शैलेन्द्र सिंह ढाका
कृषि वैज्ञानिक/प्रभारी कृषि विज्ञान केंद्र पीलीभीत।
चीनी मिल खरीदेगी रोग ग्रस्त गन्ना
सहकारी मिल गेट के दर्जनों गांवों में रेड राट बीमारी का प्रकोप है। किसानों को 2 माह से जागरूक किया जा रहा है। 5 हजार पम्फलेट वितरित कराए गए हैं। रोग ग्रस्त सभी गन्ना सहकारी मिल खरीदेगी। दूसरी मिलें भी यह गन्ना खरीद रहीं हैं। किसानों को प्रजाति बदलकर फसल में गैप भी करना चाहिए।
संजय कुमार श्रीवास्तव
ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक पूरनपुर।

