पुरातन परंपरा निभाई : सब्जी पूड़ी खाकर कराई गन्ने की बुबाई
घुंघचाई। गन्ने की फसल करने को लेकर किसानों में बड़ी उत्सुकता रहती थी और मजदूरी ना मिले कोई बात नहीं लेकिन खानपान की उत्तम व्यवस्था गन्ना बुवाई करने वाले काश्तकार द्वारा की जाएगी इस पर ही सहभागिता करते हुए लोग गन्ने की बुवाई करते थे। पुरानी रश्मे आज भी पुराने दिनों की याद दिलाती हैं। गन्ना काश्तकारों के लिए यह गन्ने की खेती आर्थिक प्रबलता की प्रतीक है जिसके बल पर किसान काफी कुछ बना पाते हैं। गन्ने की बुवाई का दौर इस समय चल रहा है ढूंढे से मजदूर नहीं मिलते। पुरानी परंपराओं के आधार पर आज भी ग्रामीण अंचलों में गन्ना की बुवाई के लिए लोग पूरी पकवान मिठाई लेकर पहुंचते हैं जहां पर छोटे-छोटे बच्चे गन्ने की बुवाई में अग्रणी भूमिका निभाते हैं जिसमें काश्तकारों का काफी सहयोग हो जाता है और श्रमिक ना मिलने से किसानों की समस्याएं भी हल हो जाती हैं। क्षेत्र के ही आज एक उन्नतशील किसान द्वारा गन्ने की बुवाई का दौर था। जहां पर समाचार दर्शन की टीम पहुंची और देखा कि बड़े ही बेहतर तरीके से गन्ने की बुवाई का कार्य किया जा रहा है।

इस दौरान जो इस कार्य में सहयोगी हैं उनके लिए पूड़ी सब्जी मिठाई का बंदोबस्त बेहतर तरीके से किया गया। हालांकि यह परंपरा पूर्वजों के अनुसार गन्ने की बुवाई के दौरान पहले से ही तय है लेकिन आधुनिक युग में लोग श्रमिकों पर ही आधारित रहते हैं। जिनका गन्ना बुवाई का कार्य था उन्होंने लोगों से बुवाई के लिए सहयोग की बात की जैसा पहले होता था और लोग तैयार हो गए। यह पुरानी परंपरा की अनोखी सभ्यता देखते ही बनती है। हालांकि पहले कढ़ी चावल भी बनता था पर अभी सिर्फ सब्जी पूड़ी ही परोसी गई। रिपोर्ट-लोकेश त्रिवेदी

