
जबरन नरई फूंकने के बाद अब साठा लगा कर दी जा रही प्रशासन को चुनौती, अफसरों ने साधी चुप्पी, भाकियू बता रही नुकसान
पीलीभीत। आप सबको याद होगा कि किसान आंदोलन के दौरान अपने जिले में भी जबरन नरई जलाकर प्रशासन को चुनौती दी गई थी। उस समय जिलाधिकारी ने नरई जलाने से रोकने के लिए अधिकारियों की ड्यूटी लगाई थी। सबसे संवेदनशील पूरनपुर में एडीएम एफआर का दफ्तर खुलवा दिया था। गांव गांव लोगों को समझाया जा रहा था। वही हालात फिर से बन गए हैं। आज नरई की तर्ज पर जबरन साठा धान लगाने के कई मामले प्रकाश में आए। पहले अंडबोझी और पिपरिया मजरा में साठा धान रोपा गया।
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उसके बाद गोपालपुर गांव से भी जबरन साठा धान लगाने के वीडियो सामने आए हैं।
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उधर स्थानीय प्रशासन इस मामले में अब तक कोई कार्रवाई नहीं कर पाया है। माना जा रहा है कि इसी तरह अन्य किसान भी साठा धान की रोपाई करेंगे। पूरनपुर के तहसीलदार अशोक कुमार गुप्ता ने बताया कि कृषि विभाग से दिशा निर्देश मांगे गए हैं जबकि जिला कृषि अधिकारी डॉ विनोद कुमार सिंह का कहना है कि यह मामला हाई कोर्ट में है। जिला प्रशासन द्वारा काउंटर दाखिल किया गया है। ताजा अपडेट की जानकारी करा रहे हैं।
भाकियू कर रही जागरूक : मंजीत सिंह

भारतीय किसान यूनियन काफी समय से किसानों को साठा धान न लगाने के लिए जागरूक कर रही है। इसमें पानी की खपत अधिक है, कई जगह समरसेबल पड़ गए हैं और डार्क जोन में जनपद जा सकता है। खाद व कीटनाशक के अधिक उपयोग से फसलें जहरीली हो रही हैं। इसको लेकर हम हाईकोर्ट तक गए जिस पर सरकार को निर्देश दिए गए और उसके बाद तत्कालीन जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव ने इस धान पर पाबंदी लगा दी। पड़ोसी जनपद शाहजहांपुर में भी पाबंदी है। अब कुछ बड़े फार्मर इसे जबरन लगा रहे हैं जो कि उनके खुद के हित में भी नहीं है। इन को देखते हुए छोटे किसान भी लगाने लगेंगे जिससे यह कुप्रथा फिर से शुरू हो जाएगी।

मेरी सभी किसान भाइयों से अपील है कि साठा धान ना लगाएं। यह ना तो किसान के हित में है और ना जमीन के हित में, और ना ही पानी की उपलब्धता के हिसाब से जायज है। जिला प्रशासन को भी इस पर एक्शन लेना चाहिए।
सरदार मंजीत सिंह,
वरिष्ठ जिला उपाध्यक्ष भारतीय किसान यूनियन पीलीभीत।

