“योगी जी” की बेहतरीन गजल : “दुश्मनी इस तरह निभाओ ना, दोस्त बनकर भी कभी आओ ना”

 

दुश्मनी इस तरह निभाओ ना
दोस्त बनकर भी कभी आओ ना।

तुमको देखे बहुत जमाना हुआ
नकली चेहरा जरा हटाओ ना।

दर्द की दहशतें तो देख चुका
मुस्कुराकर जरा दिखाओ ना।

फरेब धोकों का अन्धेरा है
एक शम्मे वफ़ा जलाओ ना।

भले ही फिर कभी न आना तुम
मुड़ के एक बार देख जाओ ना।

हद में रहने का अगर शौक तुझे
प्यार की हद तक चले आओ ना

सुन के राहत मिले मेरे दिल को
फिर से वो दास्ताँ सुनाओ ना ।

रचनाकार- योगेंद्र कुमार “योगी”

(जिला विकास अधिकारी , पीलीभीत)

जी(जिला विकास अधिकारी, पीलीभीत)

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