
सांसद के नाम पत्र : कवि व पत्रकार सतीश मिश्र “अचूक” से जानिए क्या हो सकता है पीलीभीत में ट्रेन संचालन का देशी जुगाड़
पीलीभीत में ट्रेन संचालन की समस्या का हल करने हेतु निरंतर प्रयास हो रहे हैं। अब इस समस्या पर यहां के कवि व पत्रकार सतीश मिश्र अचूक ने अपनी व्यंग्यात्मक शैली में स्थानीय सांसद केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद के नाम एक पत्र लिखा है जो वायरल हो रहा है। आपको भी यह देशी जुगाड़ इस खबर में अंत तक जरूर पढ़ना चाहिए।
ट्रेन संचालन का देशी जुगाड़
सेवा में,
श्रीमान Jitin Prasada जी
सांसद पीलीभीत एवं केंद्रीय राज्यमंत्री भारत सरकार
आ. महोदय
जैसा कि सर्वविदित है कि पीलीभीत और पूरनपुर वालों की N.E. Railway के इज्जतनगर मंडल में पीलीभीत मैलानी, पीलीभीत शाहजहांपुर और पीलीभीत बरेली रूट पर पैसेंजर और दिल्ली, लखनऊ व अमृतसर के लिए एक्सप्रेस ट्रेन की जरूरत है। आपको सांसद बने 2 वर्ष होने को हैं और आप जनता की ट्रेन संबंधी मांग जनता के अनुसार पूरी नहीं कर पाए हैं। ऐसे में लोग नाराज हो रहे हैं और आपकी क्षमता पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि मुझे आपकी क्षमता का बखूबी पता है। हम सब जान गए हैं कि आप नई ट्रेन चलवाने के बजाय चल रहीं ट्रेनों का मार्ग विस्तार और स्टॉपेज आसानी से करा दे रहे हैं। आपकी इतनी सी बात रेल मंत्री जी मान ही जाते हैं।
हालांकि मैं जानता हूं कि नई ट्रेनें चलवाना आपके लिए कुछ भी नहीं है आप तो इतने पावरफुल मंत्री हैं कि चाहें तो इतनी अधिक ट्रेन चलवा दें कि इन रूट के समपार खुल ही न पाएं परन्तु मुझे पता है कि आपके पास काफी अधिक काम हैं और देश संकटकाल से भी गुजर रहा है ऐसे में मैं कुछ टिप्स दे रहा हूं जिनसे सांप भी मर जाएगा और लाठी भी नहीं टूटेगी।
1-जितनी भी ट्रेन पीलीभीत टनकपुर, पीलीभीत मैलानी, पीलीभीत बरेली और पीलीभीत शाहजहांपुर होकर इस समय चल रहीं हैं उनका एक नया रूट (रिंग रूट) बनाकर विस्तार करा दीजिए। कोई ट्रेन पीलीभीत से चले तो सीधे बरेली जाए, वहां से शाहजहांपुर होकर फिर वापस पीलीभीत आ जाए। पीलीभीत से पुन: चलकर मैलानी, लखीमपुर वाया सीतापुर, शाहजहांपुर बरेली होकर पुन: पीलीभीत आ जाए, इसे टनकपुर तक विस्तार दे दिया जाए। जब ट्रेनों के कई राउंड होंगे तो आप यहां की जनता को इतनी ट्रेनों में ही खुश कर सकते हैं। मार्ग विस्तार आप आसानी से करा सकते हैं और फेरा बढ़ने पर अब कौन सा डीजल का खर्च बढ़ेगा। आपको, अश्वनी वैष्णव जी को बार बार रेल विस्तार को हरी झंडी दिखाने के असीमित अवसर भी मिलेंगे, आप चाहें तो हर स्टेशन व हालत पर रुकवाकर इन ट्रेनों को झंडी दिखाते रहें। स्थानीय विधायकों व अन्य छुटभैया नेताओं को भी अपनी राजनीति मुफ़्त में रेलवे के खर्च पर चमकाने का सुअवसर मिल जाएगा।
2..सिर्फ 4 एक्सप्रेस ट्रेन ऐसी चलवाइए जो पीलीभीत होकर लखनऊ व दिल्ली के बीच दिन रात दौड़ती रहें। नई चलने में बाधा हो तो पहले से चल रहीं ट्रेनों का ही मार्ग विस्तार करवा दीजिए या दूसरे रूट की ट्रेन इधर डायवर्ट करा दीजिए। लेकिन इनको झंडी सीधे प्रधानमंत्री जी से ही दिखवाइए ताकि आपकी और आपकी कार्यक्षमता को देश दुनिया जान पाए।
3-अश्वनी वैष्णव जी आपके मित्र हैं उनसे कहकर एक “छोटू इंजन” तैयार कराइये जिसमें 2 से 4 डिब्बे जोड़कर दौड़ने की क्षमता हो। इसमें वे डिब्बे जुड़वा दीजिए जो स्थानीय स्टेशनों पर लावारिश से लगातार खड़े रहते हैं। इसे रेल बस की तरह यूज करके वोटर्स रूपी यात्रियों को परम सुख प्रदान कर सकते हैं। क्योंकि अंधे को सिर्फ 2 आँखें ही चाहिए होती हैं। यहां के लोगों को 50 डिब्बो की ट्रेन की फिलहाल कोई जरूरत नहीं है। यहां के लोग 2..4 डिब्बों से ही काम चला लेंगे।
4- अगर “छोटू इंजन” न बन पाए तो यहाँ के लोगों को यह अनुमति दिलवा दीजिए कि वे अपने ट्रैक्टर में लोहे के पहिये लगवाकर रेल लाइन पर चलने योग्य बना सकें। इन ट्रैक्टरों में डिब्बे जोड़कर स्थानीय रूटों पर ट्रेन बस बनाई जा सकती है। यह आधुनिक ट्रैक्टर ट्रेन बुलेट ट्रेन का भी सपना साकार कर सकती है बशर्ते इस लाइन पर चलने वाली बुलेट मोटर साइकिल में भी लोहे के पहिये लगें और इसे बिजली से रेल ट्रेक पर दौड़ाया जा सके। इस सिस्टम को संचालित करने हेतु स्थानीय नेताओं को ही ठेका दिलवाने की वकालत करता हूं। क्योंकि इनका अनुभव काबिले तारीफ है। ट्रैक्टर ट्रेन में एक दो मालगाड़ी के डिब्बे भी जुड़वाइए ताकि रेल से रेत, मिट्टी, लकड़ी आदि का परिवहन सुगम हो सके और ठेकेदार रेत को सोना बनाने में और पारंगत हो जाएं। इससे यह दिक्कत भी दूर होगी कि 1 वर्ष तक लोग रेत, मिट्टी को ही पूर्ववत सोना समझते रहेंगे। इससे मोदी जी के सोना न खरीदने के आवाहन का असर भी दिखेगा।
5- अगर इतना भी न कर पाएं तो एक पावर चालित ट्राली ही संचालित करवा दीजिए जो मेलोडी ब्रांड टाफियों से लैस हो और निरंतर स्थानीय लाइनों पर दौड़कर ट्रेन का अहसास कराती रहे और जो भी सवारियां स्टेशन, हाल्ट या रेल ट्रैक के किनारे खड़ी हों उनको टॉफियां वितरित करते रहें ताकि संकटकाल में भी लोगों की खिलखिलाहट जारी रह सके।
6..आप लोग भी अच्छे चिंतक हैं कोई और देशी उपचार/ फार्मूला इस समस्या का आपके जेहन में हो तो कमेंट बॉक्स में बेहिचक लिखने का कष्ट करें। डरिये मत, समझ लीजिए कि जो डर गया सो मर गया। अपनी बात कहने और लिखने का साहस कीजिए। समझ लीजिए कि हम लोग काकरोच से तो सुपर हैं ही अगर वे आगे आ सकते हैं तो हम लोग क्यों नहीं।
7..मंत्री महोदय जब अश्वनी जी से मुलाकात हो तो कहिये कि कोविड कॉल में समाप्त की गई पत्रकारों की निशुल्क ट्रेन यात्रा को पुनः चालू करवा दें क्योंकि इससे बजट में घाटा ज्यादा नहीं बढ़ेगा। उनकी ट्रेन डीजल पेट्रोल या गैस से न चलकर बिजली से ही संचालित हो रही है। 2..4 पत्रकार भी यात्रा कर लेंगे तो रेल मंत्रालय कंगाल तो नहीं ही होगा।
धन्यवाद
आपका शुभचिंतक
सतीश मिश्र “अचूक”
(कवि/पत्रकार)

