ब्रम्हाकुमारी आश्रम में वर्चुअल ढंग से मनाई गई जन्माष्टमी, सजीव जुड़े 200 से अधिक श्रद्धालु

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ब्रह्माकुमारीज पूरनपुर द्वारा मनाया गया जन्माष्टमी पर्व ब्रह्माकुमारी रीमा बहन ने बताया यह अध्यात्मिक रहस्य

श्री कृष्ण की झांकिया तो हम हर वर्ष मनाते हैं और बनाये भी क्यों ना ,वो है ही इतना प्यारा इतना मनमोहक , इतना आकर्षक !

परन्तु आज आवश्यकता इस बात की है कि हम स्वयम में झाँक कर देखे की क्या हम भी इतने आकर्षक है शांत।

हमारे दामन में कहीं कोई दाग तो नही …
,हम सभी आज अपने विकारी, संस्करों ,को नष्ट,करे और दूसरे ,लोगों,को,हम,हमारे
व्यवहार,से,सुख,शांती,दे।

आज के परिदृश्य में देखे तो पाएँगे की हर क्षेत्र मे तमो की प्रधानता है तो ऐसे मे श्री कृष्ण की झांकी औऱ श्री कृष्ण का आहवान कहाँ तक सार्थक है !

श्री कृष्ण के मन्दिरो मे हर प्रकार की स्वच्छता बरती जाती है शुद्ध भोजन का भोग लगाया जाता है ,लोग अशुद्ध संकल्पो , व्यवहारों , एवम विकारों से भी बचकर रहते है इसलिए सबसे पहले श्री कृष्ण का आव्हान करने के लिए हमे आहार , व्यवहार एवम विकार के शुद्धि करण की आवश्यकता है आज सभी के ह्रदय रूपी सिंहासन पर किसी न किसी विकार ने कब्जा किया हुआ है ।

उस मधुसूदन को अशुद्ध हाथ छू नही सकते , अपवित्र दृष्टि देख नही सकती , आपवित्र वृति वाले लोग उस तक पहुंच नही सकते ,विकारी व्यक्ति के हाथ उसके लिए भोजन बना नही सकते इसलिए जब तक दिव्य गुणों की खुशबू से नर नारी का मन मन्दिर नही बनेगा , तब तक श्री कृष्ण जो देवताओ के सम्राट है वो यहाँ आ नही सकते , ।

इसलिय आये आज हम मन मे उठने वाले राक्षसी वृतियों का संहार कर अपने मन को मन मोहन जैसा सुंदर बनाए इस तरह इस बार जन्माष्टमी मना कर अपने जीवन मे देवत्व लाने का संकल्प करें …। Om shanti
जिसमे 200 से अधिक लोग मौजूद थे।

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