
पूरनपुर : पुलिस के सामने बांके से ताबड़तोड़ प्रहार करता रहा हमलावर
वकील पर 25 प्रहार, मूकदर्शक बना रहा निहत्था दरोगा
आइजीआरएस पोर्टल पर शिकायत की जांच करने पहुंची थी पुलिस व राजस्व टीम टीम
पूरनपुर (पीलीभीत)। तुम खड़े-खड़े तकते ही रहे, हम पर मुक्के पड़ते ही रहे। रामचरित मानस में सुग्रीव बालि युद्ध प्रसंग पर यह लाइन लिखी हैं कथावाचक पंडित राधेश्याम शर्मा ने। उनकी यह लाइनें कल तब 100 फ़ीसदी सच साबित हो गई जब मुजफ्फरनगर गांव में दो दरोगाओं के सामने हमलावर एक अधिवक्ता पर बांके से 20-25 प्रहार कर गया और निहत्थे दरोगा जी खड़े देखते ही रह गए।हालांकि बाद में उनकी चेतना जागृत हुई और उन्होंने पब्लिक के साथ दौड़कर हमलावर को पकड़ लिया। सवाल यह उठता है कि आज भी अपराधी पुलिस के इस्तकबाल को चुनौती दे रहे हैं परंतु पुलिस सक्रिय नहीं हो पा रही है। यह मामला पूरनपुर कोतवाली क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग लापरवाह पुलिस पर भी कार्रवाई करने की मांग कर रहे हैं।
पूरनपुर कोतवाली क्षेत्र के गांव मुजफ्फरनगर निवासी ताराचंद की एक एकड़ कृषि भूमि पर उनके भतीजे ईश्वर दयाल द्वारा अवैध कब्जे की शिकायत सीएम के आरजीआरएस पोर्टल और तहसील संपूर्ण समाधान दिवस में की गई थी। शिकायत के निस्तारण के लिए प्रशासन ने नायब तहसीलदार अभिषेक त्रिपाठी, कानूनगो, लेखपाल आकांक्षा राजपूत और दरोगा प्रदीप मलिक एक महिला दारोगा की टीम गठित की गयी थी। सोमवार शाम लगभग चार बजे टीम मौके पर जांच के लिए पहुंची। इसी दौरान गांव के सुदीप दीक्षित पुत्र राजकुमार भी मौके पर खड़े थे। पैमाइश के दौरान ईश्वर दयाल उर्फ छुटकू ने अपने पुत्र वीरपाल व गन्ठे के साथ मिलकर सुदीप पर बांके से ताबड़तोड़ प्रहार शुरू कर दिए। जानलेवा हमले में उन पर लोहे की छड़ी और बांका से हमला कर दिया। हमले में सुदीप गंभीर रूप से घायल हो गए। प्रत्यक्षदर्शी सुदीप के चाचा ने जो मुकदमे के वादी भी है ने बताया कि पुलिस व अन्य लोग करीब 100 मीटर दूर थे और दूर से ही सुदीप पर हुआ हमला देखते रहे। आरोपी गन्ने के खेत से निकले थे। वादी ने जाकर सुदीप को बचाया तो पुलिस व अन्य लोग भी भागे और आरोपी को पकड़ लिया गया। इस दौरान सुदीप की आंतें बाहर आ गई। पेट व हाथों पर दर्जनों प्रहार होने से वे लहूलुहान हो गए। कई नसें भी डेमेज हुई हैं। आनन-फानन में घायल को पूरनपुर सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया। हालत नाजुक होने पर डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें जिला अस्पताल रेफर कर दिया। वहां से बरेली रेफर किया गया। घटना से मौके पर अफरा-तफरी मच गई। घायल के चाचा विष्णु कुमार दीक्षित की ओर से तीनों आरोपियों के खिलाफ हमला व हत्या के प्रयास का मुकदमा दर्ज किया है। श्री दीक्षित ने बताया कि दरोगा के पास रिवाल्वर भी नहीं था और ना ही डंडा था। ऐसे में ही पुलिस ने सुदीप को बचाने का साहस शायद नहीं किया होगा। पुलिस ने बताया कि एक आरोपी जो मौके से पकड़ा गया था उससे पूछताछ करके बांका बरामद किया और जेल भेज दिया।

शेष की तलाश जारी है। पुलिस के सामने वकील पर हुए जानलेवा हमले को लेकर लोग पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं और वहां मौजूद दोनों दरोगाओं के निलंबन की मांग कर रहे हैं। अब देखना यह है की जिले के सख्त कहे जाने वाले पुलिस कप्तान इस मामले में क्या एक्शन लेते हैं।

