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धान की पराली के बाद अब गन्ने की पताई बनी बाधा, किसानों से लाइव सुनिये दोगुना नहीं मुनाफा हो रहा आधा

पीलीभीत। धान की पराली का निस्तारण तो किसानों ने जैसे-तैसे कर लिया परंतु अब गन्ने की पताई यानी पत्ती भी बहुत बड़ी मुसीबत बनकर सामने आ गई है। काश्तकार इसे जलाते हैं तो पुलिस और राजस्व विभाग के लोग उनको धमकाने पहुंच जाते हैं। घूसखोरी भी जमकर बढ़ गई है। एफ आई आर की धमकी देकर किसानों की जेब खाली की जा रही है। काश्तकार गन्ने की पताई कहां ले जाएं यह एक बड़ी समस्या है। उसका निस्तारण भी नहीं हो पा रहा है। मुनाफा दोगुना नही आधा रह गया है। आइए सुनते हैं किसानों की बात-

जुताई भी पड़ रही महंगी, पताई हटवाने के खर्च ने बढ़ाई लागत

पताई के ऊपर जब किसान जुताई के लिए ट्रैक्टर का हैरो चलाते हैं तो ट्रैक्टर लोड मांनता है। इससे डीजल की खपत भी काफी बढ़ जाती है। हैरों जमीन में ना जाकर पताई पर ही उछलता रहता है। पताई हटवाने का

ट्राली में भरकर पताई ले जाता मजबूर किसान : फोटो- सुखलाल वर्मा

खर्च 3 से 4 हजार रुपया एकड़ पहुच रहा है। लोग ट्राली में भरकर खाली स्थानों पर पताई ले जा रहे हैं। जुताई भी महंगी पड़ रही है। फोटो में देखिये किस तरह धुंआ दे रहा है पताई वाले खेत में जुताई कर रहा ट्रेक्टर-

यहां अभी तक नही हुई निस्तारण की व्यवस्था

पराली निस्तारण का कोई कैप्सूल या अन्य सुविधा अभी तक किसानों को नहीं मिल पाई है। इसके चलते किसान काफी परेशान हैं।सरकारी अफसर हो या जनप्रतिनिधि कोई भी किसानों की समस्या सुनने को तैयार नहीं है। बेचारे किसान क्या करें किससे कहे हिमायती गायब हैं इस समय। शेर गौर फरमाइए।

दो गुनी आय का तेरा, वायदा भी ख्याली है। मुसीबत अब पताई है, रुला देती पराली है।

नहीं मेरा गुनाह कोई, जेल फिर भी दिखाई है। फेक्ट्री उगलती धुआं, नहीं देती दिखाई है। 

रिपोर्ट-पंडित लोकेश त्रिवेदी

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