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पीलीभीत के गन्ना किसानों का 270 करोड़ मिलों पर बकाया, कोई पुरसाहाल नहीं

पीलीभीत के किसानों का गन्ना मूल्य नहीं दे रहीं चीनी मिलें

-पिछले पेराई सत्र का बाकी है 116 करोड़, नहीं मिल रहा ब्याज

-मौजूद सत्र का केवल एलएच मिल ने ही शुरू किया भुगतान

पीलीभीत। एमएसपी को लेकर किसान आंदोलन कर रहे हैं तो किसानों को समझाने व अपने पक्ष में करने के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज बरेली में होंगे। वे किसानों को अपनी सरकार द्वारा किसान हित में किए गए कार्य भी गिनवाएंगे और गन्ना भुगतान दिलवाने की घोषणा जरूर करेंगे। परंतु शायद कम लोगों को ही पता होगा कि पीलीभीत के गन्ना किसानों का 270 करोड़ रूपया चीनी मिलों पर बकाया है। जिसे दिलाने में शासन प्रशासन विफल साबित हो रहा है। खास बात तो यह है कि इस बकाया में 116 करोड रुपया पिछले पेराई सत्र का बाकी है। जिसे देने में चीनी मिलें चड्डी साबित हो रही हैं। अगर सरकार वाकई में किसानों की मदद करना चाहती है तो सबसे पहले पिछले सत्र का गन्ना मूल्य दिलाया जाना चाहिए और उसके बाद वर्तमान सत्र का बकाया भुगतान 14 दिन के अंदर किसानों के खाते में भेजने की व्यवस्था करनी चाहिए। नए सत्र का एलएच मिल पीलीभीत के अलावा किसी भी मिल ने पेमेंट शुरू नहीं किया है जबकि मिलें चले डेढ़ माह से अधिक हो चुका है। अगर सरकार समय पर भुगतान नहीं करा पाती है तो यह माना जाएगा कि मुख्यमंत्री की रैली सिर्फ राजनीतिक है और किसान हितों से उनका कोई वास्ता नहीं है।

गत वर्ष का इतना है बकाया

बीसलपुर सहकारी मिल-2395.73 लाख पूरनपुर- 1710.97 लाख
बरखेड़ा चीनी मिल. 6708.12 लाख बजाज मिल पलिया- 797.27 लाख
——-/
कुल योग- 11612.09 लाख

वर्तमान सत्र का बकाया 153 करोड़

पीलीभीत एलएच मिल-9106.03 लाख बीसलपुर 705.13 लाख
पूरनपुर 698.68 लाख
बरखेड़ा 4876.10 लाख
———
योग 15385.94 लाख

ब्याज देने व दिलाने के प्रयास भी विफल

गन्ना मूल्य का भुगतान 14 दिन में करने की बात शासनादेश में लिखी गई है। अगर चीनी मिलें 14 दिन में भुगतान नहीं कर पाती है तो उन्हें किसानों को ब्याज देना चाहिए परंतु ना तो चीनी मिलें कभी किसान को ब्याज देती हैं और ना ही गन्ना विभाग ब्याज दिलवा पाता है। दिलवाना तो दूर की बात अपने लेखा जोखा में ब्याज लगाने की हिम्मत भी गन्ना विभाग नहीं जुटा पाता। अगर सरकार वाकई में किसान हितेषी है तो 14 दिन के बाद किसानों को ब्याज दिलाया जाना चाहिए। ब्याज दिलाने के लिए पूर्व विधायक व किसान नेता बीएम सिंह न्यायालय से आदेश भी ला चुके हैं। इसका अनुपालन कराने में भी सरकार पूरी तरह विफल रही है। भाजपा सरकार ही नहीं इससे पहले की सरकारें भी किसानों को ब्याज दिलाने में विफल रही हैं। इसे कांट्रैक्ट फार्मिंग का खुला उल्लंघन माना जा सकता है।

भुगतान दिलाने के लगातार कर रहे प्रयास : डीसीओ

किसानों का गत वर्ष का गन्ना मूल्य भी बकाया है जिसे दिलाने के लिए लगातार पत्राचार किया जा रहा है। शीघ्र ही नए सत्र का भुगतान भी कराया जाएगा। अभी सिर्फ एलएच मिल पीलीभीत ने नए सत्र का भुगतान शुरू किया है।
जितेंद्र कुमार मिश्रा जिला गन्ना अधिकारी पीलीभीत।

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